लॉकडाउन को लेकर WHO ने फिर की भारत की तारीफ लेकिन इस बात के लिए किया अलर्ट 

लॉकडाउन को लेकर WHO ने फिर की भारत की तारीफ लेकिन इस बात के लिए किया अलर्ट

Lockdown को लेकर WHO ने फिर की भारत की ...
जिनेवा। पूरी दुनिया इस वक्त कोरोना वायरस (कोविड-19) महामारी से जूझ रही है। दुनियाभर में अब तक कोरोना से 33 लाख से ज्यादा लोग संक्रमित हो चुके हैं और दो लाख से अधिक लोगों की मौत हो गई है। भारत में भी कोरोना वायरस का प्रकोप बढ़ता ही जा रहा है, यहां पर कोरोना के मामले बढ़कर 42533 हो गए हैं और अब तक 1373 लोगों की जान जा चुकी है, राहत की बात यह है कि 11707 लोग कोरोना से जंग जीतकर अपने घर जा चुके हैं।

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विश्व स्वास्थ्य संगठन ने की भारत की तारीफ

तो वहीं इसी बीच विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने कोरोना वायरस पर अंकुश लगाने के लिए पूरे भारत में लॉकडाउन लागू करने के मोदी सरकार के फैसले की सराहना की है। कोविड-19 के लिए डब्ल्यूएचओ के विशेष प्रतिनिधि डॉ. डेविड नाबरो ने The Economic Times को दिए गए इंटरव्यू में भारत के प्रयासों की तारीफ की है, डेविड नाबरो ने कहा कि वह कोविड-19 को रोकने के लिए भारत के समय पर उठाए गए कदमों और कठिन कार्यो की सराहना करते हैं।

लॉकडाउन के बाद रहना होगा हर तरह से तैयार

उन्होंने कहा कि संख्या के बारे में बात करना अभी जल्दबाजी हो सकती है, लेकिन राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन के अलावा आइसोलेशन और कोरोना संक्रमित व्यक्ति के संपर्को का पता लगाने से वायरस का प्रसार रोकने में जरूर सफलता मिली, डेविड नाबरो ने कहा कि भारत में लॉकाडउन को जल्दी लागू करना एक दूर की सोच थी, साथ ही ये सरकार का साहसिक फैसला था, इस फैसले से भारत की जनता को कोरोना वायरस के खिलाफ मजबूती से लड़ाई लड़ने का मौका मिला।

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भारत में लॉकडाउन को काफी जल्दी लागू किया गया,

भारत में लॉकडाउन को काफी जल्दी लागू किया गया, ये तब अमल में लाया गया, जब यहां कोरोना के काफी कम मामले थे, निश्चित तौर पर ये भारत का दूरदर्शी फैसला था, हालांकि कुछ लोगों को इस फैसले से दिक्कत हुई है लेकिन अगर देर से लॉकडाउन होता तो कई लोगों की जान जा सकती थी साथ ही ये बड़े स्तर पर फैल सकता था। नाबरों ने कहा कि अभी भी हमें सख्ती से फिजिकल डिस्‍टेंसिंग का पालन करना होगा, लॉकडाउन खत्म होने के बाद भी क्योंकि हमें उन सिद्धांतों को लागू करने की ज़रूरत है जो हमने सीखा है क्योंकि लॉकडाउन के बाद कोरोना के केस बढ़ सकते हैं इसलिए इसे लागू करने के साथ ही जांच, मरीजों की पहचान, आइसोलेशन और उन्हें उपचार के जरिए इस लड़ाई को जीता जा सकता है।

ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी ने भी कही बड़ी बात

यहां आपको बता दें कि 11 में से 10 देश लॉकडाउन के बाद नए मरीजों की पहचान करने और उनकी संख्या को रोकने में कामयाब हुए हैं। 11वां देश भारत है जिसे फिलहाल यह कामयाबी अभी नहीं मिली है, फिलहाल देश तीसरे लॉकडाउन में प्रवेश कर चुका है।

ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी

ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी ने लॉकडाउन कठोरता सूचकांक में बताया है कि भारत में 21 दिन के पहला लॉकडाउन में जांच की गति काफी मंद थी, दूसरे चरण में आते आते गति बढ़ी और मरीजों का आंकड़ा भी, फ्रांस, स्पेन और इटली में भी लॉकडाउन के दौरान नए मरीजों की संख्या घटी लेकिन भारत में 38 दिन बाद पहली बार 2411, फिर 3 हजार से ज्यादा मरीज सामने आए हैं

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